सुबह का भूला अगर शाम को घर आ जाये तो उसे भूला नहीं कहते

इंसान गलती और गुनाह का पुतला है। अपने ज़िन्दगी के हर मोड़ पर वह गलतियां करता है। वास्तव में ईश्वर ने इंसान को गलती की प्रवृत्ति और फितरत पर पैदा किया है।

इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि उसने इंसानों के साथ अन्याय किया है बल्कि ईश्वर के द्वारा इस सृष्टि की रचना का मकसद इन्सानों की आजमाईश कर उनकी परीक्षा लेना था। इसी के साथ उसने इंसान को सही और ग़लत के फर्क को समझने की ज़बरदस्त क्षमता से लैस भी किया है।

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