बिना दवा के रोग दूर कैसे करें

अनेक रोगों को दूर करने वाला व्याधिहर वैष्णव कवच स्तोत्र :- 

→    विष्णुर्मामग्रत: पातु कृष्णो रक्षतु पृष्ठत:। हरिर्मे रक्षतु शिरो हृदयं च जनार्दन: ।।

मनो मम हृषीकेशो जिह्वां रक्षतु केशव:। पातु नेत्रे वासुदेव:श्रोत्रे सड़्कर्षणो विभु: ।।

प्रद्युम्न: पातु मे घ्राणमनिरूद्धस्तु चर्म च । वनमाला गलस्यान्तं श्रीवत्सो रक्षतादध: ।।

पार्श्व ं रक्षतु मे चक्रं वामं दैत्यनिवारणम् । दक्षिणं तु गदा देवी सर्वासुरनिवारिणी ।।..........

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