पर्यावरण प्रदूषण क्या है? पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार, कारण, और प्रभाव क्या है? पर्यावरण प्रदूषण को कम कैसे करें?

पर्यावरण प्रदूषण क्या है? पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार, कारण, और प्रभाव क्या है? पर्यावरण प्रदूषण को कम कैसे करें?

जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती जा रही है
औद्योगीकरण,नगरीकरण में भी बढ़ोतरी होती जा रही है. और जैसे-जैसे
औद्योगीकरण ,नगरीकरण बढ़ रहा है उसी गति से पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ रहा
है. सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली जो कि हमारे देश की राजधानी है पहले
स्थान पर है इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में प्रदूषण किस हद
तक बढ़ रहा है.


चलिए देखते हैं पर्यावरण प्रदूषण क्या है? पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार, कारण, और प्रभाव क्या है? पर्यावरण प्रदूषण को कम कैसे करें? और इसके बारे में अन्य जानकारियां.


पर्यावरण प्रदूषण क्या है?


पर्यावरण प्रदूषण क्या है? Image


प्राकृतिक वातावरण की भौतिक, रासायनिक
और जैविक विशेषताओं में अवांछनीय परिवर्तन लाने वाले पदार्थ को प्रदूषक
कहते हैं। जब यह प्रदूषक लंबे समय तक पर्यावरण में मौजूद रहते हैं तो यह
प्रदूषण फैलाते हैं इस प्रकार प्रदूषकों के द्वारा पर्यावरण में होने वाले
प्रदूषण को पर्यावरणीय प्रदूषण कहा जाता है।
यद्यपि कुछ प्राकृतिक प्रदूषक जैसे ज्वालामुखी है।


लेकिन सामान्यत प्रदूषण मानव
क्रियाकलापों के कारण ही होता है । जैव अवक्रमण योग्य प्रदूषक जैसे मल का
यदि सही ढंग से विसर्जन किया जाए तो यह स्थाई क्षति नहीं पहुंचाता परंतु
ऐसे प्रदूषक जिनका जैव अवक्रमण संभव नहीं है जैसे कि सीसा इस कारण यह आहार
संख्या में ऊपर की ओर बढ़ते हुए सं केंद्रित हो जाते हैं जिसके कारण
पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है।


पर्यावरण प्रदूषण के कारण


पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण इस तरह है


1. जनसंख्या वृद्धि
2. स्त्रोतों का अनियंत्रित दोहन
3. आर्थिक विकास
4. परिवहन विस्तार
5. आधुनिक तकनीकों का प्रसार
6. जनता का अशिक्षित एवं गरीब होना
7. उर्वरकों तथा कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग
8. वनों का विनाश
9. विशाल सिंचाई
10. विषाक्त गैंसें
11. तीव्र एवं कर्कश ध्वनि
12. पर्यावरण में बढ़ती हुई रेडियोर्मिता


पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार



वायु प्रदूषण


वायु प्रदूषण Image


पृथ्वी के वायुमंडल में मानव निर्मित
प्रदूषण का मौजूद होना वायु प्रदूषण कहलाता है। जिससे संपति, पौधों पशुओं,
मनुष्य के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। 


सामान्यतः वायु प्रदूषण में कार्बन डाई
ऑक्साइड ,कार्बन मोनोऑक्साइड, सीसा ,नाइट्रोजन ऑक्साइड, ओजोन ,अथवा सल्फर
डाइऑक्साइड शामिल होते हैं। कार्बन डाई आक्साइड ,कार्बन मोनो ऑक्साइड,
नाइट्रोजन ऑक्साइड ,सीसा और भारी धातुओं के निलंबित कणो के उत्सर्जन के
कारण नगरीय वातावरण ग्रामीण वातावरण की अपेक्षा अधिक प्रदूषित होता है ।


वायु प्रदूषण के कारण कई रोग जैसे
खांसी ,दमा, श्वास नली शोथ जुखाम, थकान, निमोनिया, फेफड़ों का संक्रमण ,
उच्च रक्तचाप ,  हृदय रोग विभिन्न प्रकार के कैंसर इत्यादि से पीड़ित लोगों
की संख्या बढ़ रही है ।


मानव के अतिरिक्त वायु प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव वनस्पति ,जानवरों ,सूक्ष्म जीवों पर भी पड़ा रहा ‌है।


वायु प्रदूषण को कम कैसे करें?


  • वाहनों से उत्सर्जित धुएं को कम करना।
  • डीजल या पेट्रोलियम की गुणवत्ता में सुधार।
  • इंधन के वैकल्पिक स्रोत का उपयोग जैसे (सीएनजी, एलपीजी।)
  • सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग।
  • वाहनों को विकसित करने के लिए तकनीक में सुधार।
  • लोगों में जागरूकता।

जल प्रदूषण


जल प्रदूषण Image


जल मानव के लिए जीवन का एक महत्वपूर्ण
अंग है स्वच्छ जल स्वास्थ्य और मानव विकास के लिए अनिवार्य है ।जल की
भौतिक, रासायनिक, जैविक विशेषताओं में परिवर्तन जिससे मानव और जलीय जीवन पर
प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जल प्रदूषण कहलाता है ।दुर्भाग्यवश भारत में उपलब्ध जल का 70% से अधिक भाग प्रदूषित है।


जल प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं


1. नगरीकरण


नगरीय केंद्रों को गेर योजनाबद्ध विकास
अपरिहार्य रूप से अधिक मात्रा में घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट उत्पन्न करता
है। नगरीय स्थानों में अत्यधिक ऊर्जा का उपभोग बड़ी मात्रा में अपशिष्ट
जल, घरेलू कचरा, उत्पन्न करता है मल निस्तारण व्यवस्था के अपर्याप्त विकास
के कारण अधिकतर नदियां, झीलें ,तालाब ,


कुएं प्रदूषित हो चुके हैं। भारत में
नगर निगम द्वारा प्रदान की गई जल के सफाई की सुविधा अंतरराष्ट्रीय स्तर की
नहीं है नगरीय क्षेत्रों में जल का स्तर निम्न है खासकर अप्राधिकृत कॉलोनी
और गंदी बस्तियों में।


2. औद्योगिकरण


औद्योगिक अपशिष्ट में ठोस अपशिष्ट, तथा
कूड़ा के अतिरिक्त रसायन ,डिटर्जेंट ,धातु और कृत्रिम योगिक होते हैं ।यह
प्रदूषक सामान्यतः नदियों में बहा दिए जाते हैं फल स्वरूप भारत के अधिकतर
नदियां और झीलें तालाब ,औद्योगिक अपशिष्ट द्वारा प्रदूषित हुए हैं।


3. नदियों के जल का उपयोग


ज्यादातर  नदियों के जल का उपयोग
सिंचाई उद्योग और घरेलू कामकाजो के लिए किया जाता है मैदानी क्षेत्रों में
सामान्यतः शीत और ग्रीष्म ऋतु में जल की मात्रा बहुत कम हो जाती है इस अवधि
में नदी में बहने वाला जल सम्मिलित रूप से छोटी सरिता तथा अपवाहिकाओं का
जल होता है। दिल्ली के निकट यमुना नदी में जल की मात्रा बहुत कम है
प्रत्येक नदी को अपनी परिस्थिति को बनाए रखने के लिए वर्ष भर एक न्यूनतम
स्राव कायम रखना जरूरी होता है।


4. फसलों की सुरक्षा के लिए रसायनों का उपयोग


कृषि क्षेत्र में अधिक उत्पादकता वाले फसलों की किस्मों की शुरुआत के बाद रसायनिक खादों ,कीटनाशकों ,


पीड़कनाशी इत्यादि का उपयोग बढ़ गया
है। इन निवेशकों का सफलता पूर्वक उपयोग उन्हीं क्षेत्रों में किया जा सकता
है जहां नियंत्रित सिंचाई उपलब्ध होती है। वास्तव में कीटनाशकों के प्रयोग
के कारण मृदा की उर्वरता में परिवर्तन हुआ है तथा मृदा में उपयोगी जीवाणु
समाप्त होते जा रहे हैं और इससे भूमिगत जल प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है।


5. धार्मिक तथा सांस्कृतिक रिवाज


धार्मिक रिवाजों के कारण नदियों में प्रदूषण बढ़ा है।
मवेशियों तथा मनुष्यों के शवों के निस्तारण के कारण भारत में नदियां
प्रदूषित होती जा रही है ।विवादों के कारण पवित्र गंगा सबसे अधिक प्रभावित
हुई है।


6. जल प्रदूषण का प्रभाव


प्रदूषित जल का विपरीत प्रभाव भारत में
लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ा है प्रदूषित जल के कारण अनेक बीमारियां फैलती
हैं जैसे हेजा अतिसार , क्षयरोग। भारत में पेट से जुड़ी हुई बीमारियों में
80% जल संक्रामक होती है इन बीमारियों से सबसे अधिक प्रभावित नगर  गंदी
बस्तियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे होते हैं।


मृदा तथा भूमि प्रदूषण


मृदा तथा भूमि प्रदूषण Image


मृदा मानव जाति के लिए अत्यंत उपयोगी व
जीवनदायिनी है ।मृदा मनुष्यों के क्रियाकलापों तथा कभी-कभी पर्यावरणीय
संकट के कारण प्रदूषित हो जाती है मृदा तथा भूमि प्रदूषण के मुख्य कारक है
-मृदा अपरदन ,रासायनिक खादों ,फसलों की सुरक्षा हेतु अन्य रसायनों का
अत्यधिक उपयोग, नगरीय तथा औद्योगिक क्षेत्रों के द्रवित और ठोस अपशिष्टों
द्वारा ,


जंगल की आग ,जल के जमाव संबंधित केशिका क्रिया 


तथा खनन अपशिष्टों द्वारा भी मृदा प्रदूषण होता है ।


रासायनिक खादों ,कीटनाशक ,पीड़कनाशी का
नियंत्रित प्रयोग कर मृदा प्रदूषण को कम किया जा सकता है ।नगरीय तथा
औद्योगिक बहिस्राव की समुचित सफाई कर इसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा
सकता है।


ध्वनि प्रदूषण


ध्वनि प्रदूषण Image


ध्वनि प्रदूषण वायुमंडलीय प्रदूषण का
एक मुख्य भाग है किसी अवांछनीय अत्यधिक तीव्र ध्वनि द्वारा लोगों को पहुंची
है असुविधा एवं अशांति को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। नगरीकरण तथा औद्योगिकरण
के कारण भारत में ध्वनि प्रदूषण बढ़ गया है ।ऑटोमोबाइल, फैक्ट्री ,मशीनें
धार्मिक स्थानों पर लाउडस्पीकर ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है। ध्वनि
प्रदूषण के कारण स्वर्ण शक्ति को नुकसान पहुंचता है इसके कारण मानसिक तनाव,
ह्रदय रोग, रक्तचाप ,चिड़चिड़ा हट, थकान ,और पेट की बीमारियां होती है. 


ध्वनि प्रदूषण को कम कैसे करें


  • ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करने वाले उद्योगों को आवासीय क्षेत्रों से दूर ले जाकर बसाना।
  • पुरानी मशीनों का प्रतिस्थापन।
  • हॉर्न का न्यूनतम उपयोग ।
  • रेल पटरियों में सुधार।
  • नई पीढ़ी को ध्वनि प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव के बारे में जागरूक करना।

 


पर्यावरण प्रदूषण को कम कैसे करें?


  • विकासशील देशों की जनसंख्या नीति में परिवर्तन ताकि अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि को रोका जा सके।
  • विकसित देशों में नियंत्रित उपभोक्तावाद।
  • ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को घटाना।
  • विकास
    की नीतियों का मुख्य ध्यान  देशज वैज्ञानिक व तकनीकी ज्ञान आधारित तथा
    विकासशील देशों के आधारभूत संरचना में सुधार लाना होना चाहिए।
  • विश्व के सभी विकास कार्यक्रमों का सख्त पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन होना चाहिए।
  • सभी स्तर की शिक्षा में पर्यावरण की शिक्षा अनिवार्य विषय होना चाहिए।
  • व्यापक शिक्षा तथा पर्यावरण जागरूकता के कार्यक्रमों में निवेश के द्वारा निजी क्षेत्र की सहभागिता होनी चाहिए।
  • सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं की मदद से लोगों को पर्यावरण संबंधी मुद्दों के बारे में शिक्षित करना।
  • देश
    के विभिन्न भागों में पर्यावरण जागरूकता विकसित करने के लिए नियमित
    सम्मेलन संगोष्ठी या टेलीविजन तथा रेडियो वार्ताओं एवं कार्यशाला ओं का
    आयोजन करना।
  • पर्यावरण अनुसंधान के लिए अतिरिक्त निधि की आवश्यकता।
  • पर्यावरण जागरूकता में मीडिया एक अहम भूमिका निभा सकती है।

FAQ’s






पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ क्या है


पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ – पर्यावरण
में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले
दोष को कहते हैं। प्रकृति द्वारा निर्मित वस्तुओं के अवशेष को जब मानव
निर्मित वस्तुओं के अवशेष के साथ मिला दिया जाता है तब दूषक पदार्थों का
निर्माण होता है। दूषक पदार्थों का पुनर्चक्रण नही किया जा सकता है।





विश्व में सबसे प्रदूषित देश कौन सा है?


1. बांग्लादेश
2. पाकिस्तान
3. भारत
4. मंगोलिया।





विश्व में सबसे प्रदूषित शहर कौन सा है?


विश्व का सबसे प्रदूषित शहर दिल्ली है





भारत का सबसे प्रदूषित शहर कौन सा है?


भारत का सबसे प्रदूषित शहर गाजियाबाद है।






इस आर्टिकल में हमने क्या जाना?


आशा करते है कि यह पोस्ट आप के लिए मददगार रहा होगा। और आशा है कि अब आप पर्यावरण प्रदूषण क्या है?पर्यावरण प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं? जल प्रदूषण से हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है और हम पर्यावरण प्रदूषण को कम कैसे कर सकते हैं
जान गए होंगे। हम आपके सुझावों और योगदान की सराहना करते हैं। अपनी सुझाव
देने के लिए नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें जरूर बताइये।
शुक्रिया!


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