टमाटर के फायदे
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टमाटर के फायदे

37 views • Oct 18th, 2020

टमाटर एक स्वादिष्ट सब्जी है, जिसका रोगों से रक्षा करनेवाले आहार के रूप में हमारे भोजन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। मनुष्य को ज्ञात सभी खाद्य पदार्थों में यह सबसे अद्भुत और प्रभावी रक्त-शुद्धिकारकों में से एक है।

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लगभग एक सौ पच्चीस वर्ष पहले टमाटर को विषैला समझा जाता था। कई लोग इसे अम्ल बनानेवाला आहार समझते थे, जो रक्त एवं शरीर की कोशिकाओं की अम्लीयता में वृद्धि कर सकता है। ऐसा समझा जाता था कि इसका कोई आहार मूल्य नहीं है और यह भोजन को केवल रंगदार एवं सुस्वादु बनाता है।

रसायनशास्त्र के नवीनतम शोधों ने टमाटर के बारे में उन आधारहीन विचारों को पूरी तरह से दूर कर दिया है। टमाटर का उद्गम स्थान दक्षिणी अमेरिका है। वहाँ से इसे यूरोप लाया गया। लेकिन कई सौ वर्षों तक इसे केवल बगीचे की शोभा के रूप में लगाया जाता रहा। तब इसे ‘लव एप्पल’ कहा जाता था। सन् 1860 में यह पता चला कि टमाटर भी आहार के रूप में उतना ही अच्छा है जितना अन्य फल या साग-सब्जियाँ।

इस खोज के बाद यह धीरे-धीरे सारे संसार में बहुत लोकप्रिय हो गया। अब फलों व साग-सब्जियों में इसका उच्च स्थान है और इसे बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। औषधीय गुण टमाटर अति उत्तम पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर है। इसमें 3.1 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट है। मुख्यतया यह ‘इन्वर्ट शुगर’ के रूप में है, जो कि कार्बोहाइड्रेट का पहले से ही पचा हुआ रूप है। इसमें स्टार्च बहुत कम मात्रा में पाया जाता है, क्योंकि पकने की क्रिया में शक्कर मुख्यतया डेक्सट्रोस (द्राक्षा शर्करा) में परिवर्तित हो जाता है। इसमें 0.1 प्रतिशत प्रोटीन और 0.2 प्रतिशत वसा भी होती है।

टमाटर विटामिन ‘ए’, ‘बी’ तथा ‘सी’ और कई उपयोगी अम्लों का प्रचुर स्रोत है। खासतौर से इसमें विटामिन ‘ए’ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और प्रति 100 ग्राम भाग में 1000 अंतरराष्ट्रीय इकाइयाँ पाई जाती हैं। सूखा टमाटर भी विटामिन ‘ए’ का अच्छा स्रोत है। विटामिन ‘सी’ भी इसमें पर्याप्त मात्रा में होता है।

मध्यम आकार के एक टमाटर में विद्यमान विटामिन ‘सी’ पकने या डिब्बाबंदी करने पर भी लगभग पूरा शेष रहता है।

तत्त्वतः टमाटर एक क्षारीय शाक है। इसका अम्लीय स्वाद मेलिक एसिड के फलस्वरूप है, जो कि लगभग 0.5 प्रतिशत है। इसमें 0.52 से 18 प्रतिशत साइट्रिक एसिड और ऑक्जेलिक एसिड का सूक्ष्म अंश पाया जाता है। शरीर द्वारा ऑक्सीकृत होने की प्रक्रिया में यह क्षारीय भस्म छोड़ता है। यह रक्त की क्षारीयता में वृद्धि और पेशाब की क्षारीयता में कमी करता है तथा शरीर के फॉस्फेट, यूरिया एवं अमोनिया जैसे अम्लीय यौगिकों को निष्क्रिय बनाता है।

श्वास, दमा आदि में : टमाटर मुख्यतया क्षारीय होने से एसिडोसिस, समय पूर्व वृद्धावस्था और कई अन्य बीमारियों में, जो कि तंत्र में बहुत अधिक अम्ल होने के फलस्वरूप होता है, के लिए उत्कृष्ट इलाज है। ब्रोंकाइटिस (श्वास नलिकाओं का शोथ) और दमे में भी आराम पहुँचाता है। यह गुरदे को सौम्य व प्राकृतिक रूप से उत्तेजित करने का कार्य करता है। यह विष को भी बाहर निकालने में सहायक होता है, जो बीमारियाँ पैदा करता है और हमारे तंत्र को संदूषित करता है। यह स्नायु टॉनिक भी है।

बदहजमी : यह सुस्त लीवर को उत्तेजित करता है और शक्तिहीन बदहजमी में आराम पहुँचाता है। यह उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जो पित्त रोग से ग्रस्त हैं, क्योंकि यह पित्त के प्रवाह में तेजी लाता है। कब्ज-नाशक : टमाटर थोड़ा सा जुलाब देनेवाला (दस्तावर) भी है, खासतौर से जब इसे कच्चा खाया जाए।

अतः यह कब्ज में उपयोगी है। मधुमेह : इसमें कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में होने से मधुमेह के रोगियों के लिए यह अच्छा आहार है और उन लोगों के लिए भी, जो अपना वजन कम करना चाहते हैं। नेत्र-विकार : विटामिन ‘ए’ का प्रचुर स्रोत होने से रतौंधी, निकट दृष्टि और विटामिन की कमी से आँख में होनेवाली अन्य बीमारियों में यह विश्वसनीय रूप से रोधात्मक है।

स्कर्वी रोग : विटामिन ‘सी’ प्रचुर मात्रा में होने से यह स्कर्वी में भी उपयोगी है। ताजे टमाटर ताजगी देनेवाले और भूख बढ़ानेवाले होते हैं। सामान्य उपयोग भोजन की विविधता बढ़ाने के लिए टमाटर को पकाया, सेंका या भाप दी जा सकती है। यह मिश्रित सब्जी बनाने के लिए अन्य सब्जियों के साथ अच्छी तरह मिल जाता है। वैसे अधिकतर लाभ प्राप्त करने के लिए टमाटर को सलाद के रूप में सेवन करना चाहिए।

टमाटर का रस संभवतः सूप के रूप में अत्यधिक मात्रा में उपयोग में लाया जाता है। ताजे कच्चे टमाटर अत्यधिक हितकारी होते हैं। बच्चों के लिए यह संतरे के रस से ज्यादा अच्छा समझा जाता है। बच्चों की प्रतिदिन की खुराक में टमाटर का रस बच्चों की बाढ़, शरीर की कट-फट और विटामिनों की कमी से होनेवाले रोगों को रोकने में सहायक होता है। एक साल के बच्चे को टमाटर का रस दिन में तीन बार चम्मच भर देना पर्याप्त है। उम्र के साथ इसे क्रमशः बढ़ाया जा सकता है।