चौलाई के फायदे
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चौलाई के फायदे

12 views • Oct 18th, 2020

चौलाई हरी पत्तियोंवाली एक प्रसिद्ध शाक-भाजी है, जो पूरे भारत में उगाई जाती है। आमतौर पर यह सीधा, बहुधा घना, गूदेदार डंठल और हरी पत्तियोंवाला अल्प अवधि का एकवर्षीय पौधा है।

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ऐसा विश्वास किया जाता है कि चौलाई का उद्गम दक्षिण अमेरिका या मैक्सिको का एंड्रन क्षेत्र है। कुछ ने इसके भारतीय मूल को भी स्वीकार किया है। अब यह ज्यादातर उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में फैल चुका है। सामान्यतया यह भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया, म्याँमार, फिलिपींस, चीन, ताइवान, अफ्रीका देशों, कैरेबियन देशों, मध्य एवं दक्षिण अमेरिका में उगाया जाता है। चौलाई गरम मौसम की उपज है और गरमी के साथ-साथ वर्षा के मौसम में भी उगाई जाती है।

आहार मूल्य चौलाई के विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि इसके प्रति 100 ग्राम भार में आर्द्रता 85.7, प्रोटीन 4, वसा 0.5, खनिज 2.7, रेशा 1.0 और कार्बोहाइड्रेट 6.1 प्रतिशत होता है। इसके प्रति 100 ग्राम में खनिज और विटामिनों की मात्रा इस प्रकार है—कैल्सियम 397, फॉस्फोरस 83, लौह 25.5, थायमिन 0.03, रिबोफ्लोविन 0.30, नायसिन 1.2। विटामिन ‘सी’ 99 तथा कैरोटीन 5,520 माइक्रो ग्राम है। इसका कैलोरिक मूल्य 45 है।

औषधीय गुण

चौलाई के नियमित प्रयोग से विटामिन ‘ए’, ‘बी1’, ‘बी2’ और ‘सी’, कैल्सियम, लौह तथा पोटैशियम की कमी दूर होती है।

यह दोषपूर्ण नेत्र दृष्टि, कैंसर, श्वसन संबंधी संक्रमण, अल्प विकास, बाँझपन और कई अन्य बीमारियों से शरीर की रक्षा करती है।

एनीमिया : चौलाई एनीमिया के उपचार में अति लाभकारी है। इसका एक कप ताजा रस अति पाचनीय रूप में शरीर को प्रतिदिन खपत होनेवाले लौह का दुगुना लौह देता है। यह मुँह में धात्विक स्वाद या कोई जठरीय जलन पैदा नहीं करता है, जैसा कि धात्विक लौह लेने पर होता है।

श्वसन संबंधी गड़बड़ी : चौलाई श्वसन संबंधी अनियमितताओं में लाभकारी है। इसका ताजा रस शहद के साथ लेना क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, वात-स्फीति और क्षय रोग में ओषधि का कार्य करती है।

गर्भावस्था एवं दुग्ध-स्रवण : गर्भावस्था की पूरी अवधि तक चौलाई की ताजा पत्तियों का एक कप रस प्रतिदिन शहद और चुटकी भर इलायची पाउडर के साथ लेना बच्चे के सामान्य विकास में मदद करता है। यह शरीर में कैल्सियम और लौह के अतिरिक्त उपयोग को रोकता है, गर्भाशय के स्नायुओं को आराम पहुँचाता है, बिना तकलीफ के प्रसव सुगमता से होता है और प्रसवोत्तर जटिलताओं पर नियंत्रण रखता है। यह टॉनिक का कार्य करता है और माँ के दूध में वृद्धि करता है।

बच्चों का स्वास्थ्यकर विकास : चौलाई बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए बहुत उपयोगी है। बच्चे के जन्म के एक पखवाड़े के बाद चौलाई का चम्मच भर ताजा रस शहद की कुछ बूँदों के साथ मिलाकर दिन में एक बार देने से बच्चे के स्वास्थ्य और सशक्त विकास में मदद मिलती है। यह कब्ज को कम करता है और बच्चे के बढ़ने पर दाँत निकलने की प्रक्रिया को आसान बनाता है। बढ़ते हुए बच्चों को यह रस प्राकृतिक प्रोटीन टॉनिक के रूप में दिया जा सकता है। इसमें सभी आवश्यक अमीनो एसिड जैसे—अर्गेनाइन, हिस्टीडाइन, आइसोलिओसिन, लिओसिन, लाइसिन, साइस्टीन, मेथियोनिन, फिलालेनिन, थेरिओनिन, ट्रप्टोफन और वेलिन जैसे सभी आवश्यक एमिनो एसिड रहते हैं।

समय से पहले उम्र ज्यादा दिखना : चौलाई का नियमित सेवन कैल्सियम और लौह मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी को कम करके समय से पहले उम्र ज्यादा दिखने को रोकता है। उम्र बढ़ने पर कैल्सियम के कण बोन टिशू में जमा होना शुरू हो जाता है। यह अनियमित कैल्सियम वितरण टिशू में लौह के अनियमित कणों की गति को प्रभावित करता है। यदि कैल्सियम और लौह के कणों की गड़बड़ी खाद्य-कैल्सियम तथा लौह की नियमित आपूर्ति से रोकी जाती है तो प्रारंभ से शरीर को बनाए रखा जा सकता है।

रक्त निकलना : चौलाई की पत्तियों का एक कप ताजा रस नींबू के चम्मच भर रस के साथ प्रत्येक रात्रि लेने से सभी प्रकार के रक्त-स्रवण, जैसे—मसूड़े, नाक, फेफड़ा, बवासीर और अत्यधिक रजःस्राव में प्राकृतिक टॉनिक का कार्य करती है।

श्वेत प्रदर : चौलाई श्वेत प्रदर में उपयोगी है। इसकी जड़ की छाल 25 मि.ली. पानी में मसलकर व छानकर मरीज को प्रतिदिन सुबह-शाम देना चाहिए। यह इस बीमारी का बहुत ही प्रभावकारी उपचार है और बहुधा पहली खुराक ही आराम प्रदान कर देती है। चौलाई की जड़ में कीड़े बहुत जल्दी लग जाते हैं। यदि अच्छी जड़ नहीं मिलती है तो इसकी पत्तियों और शाखाओं का प्रयोग किया जा सकता है।

सूजाक : चौलाई सूजाक के उपचार में अति लाभकारी है। इसकी लगभग 25 ग्राम पत्तियों को चार औंस पानी में मसल लेना चाहिए। ऐसी अवस्था में यह मरीज को दिन में दो या तीन बार देना चाहिए। केश-वर्धन : चौलाई की ताजा पत्तियों का रस बालों में लगाने से केश-वर्धन में सहायता मिलती है। केश रेशम की तरह मुलायम रहते हैं। उनका रंग काला बना रहता है और समय से पहले सफेद नहीं होते। 