Best health tips
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Best health tips

57 views • Oct 02nd, 2020

8 घंटे सोएँ

‘शेर दिन में 20 घंटे सोता है! अगर कठोर परिश्रम से सफलता मिलती, तो जंगल का राजा गधा होता। इसलिए सोते रहो और ऐश करो!’-अज्ञात मैं जानता हूँ कि यह सलाह हर आलसी को पसंद आएगी, क्योंकि मैं मेहनत करने की नहीं, बल्कि उससे बचने की सलाह दे रहा हूँ। लेकिन यह बात सोलह आने सच है : अच्छी नींद अच्छे स्वास्थ्य की आधारशिला है। यही वह नींव है, जिस पर सेहत का महल खड़ा होता है। अगर नींव मज़बूत है

तो महल भी मज़बूत होगा। अगर नींव कमज़ोर है, तो महल भी कमज़ोर होगा। इसलिए स्वस्थ रहने का पहला शॉर्टकट है : 8 घंटे सोएँ। रात को 8-9 घंटे सोएँ। व्हाट्सएप, फेसबुक, टीवी सीरियल या क्रिकेट मैच के चक्कर में नींद ख़राब न करें। निश्चित समय पर सोने जाएँ और निश्चित समय पर उठें। कुछ हफ्तों में आपके शरीर को इसकी आदत पड़ जाएगी। और हाँ, देर तक जागने के बहाने न खोजें। इसके बजाय समय पर सोने के तरीक़े खोजें। यह भी याद रखें कि रात की नींद और दिन की नींद बराबर नहीं होतीं। दिन में 8-9 घंटे सोने से आपको वे लाभ नहीं मिल सकते, जो रात की नींद से मिलते हैं, जब ग्रोथ हॉरमोन निकलता है और आपको युवा रखता है। दिन में सोना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता है, हालाँकि 10-15 मिनट की झपकी स्वास्थ्यवर्धक समझी जाती है। कम नींद की समस्या दरअसल हमारी आधुनिक जीवनशैली की देन है। उन्नीसवीं सदी तक लोग हर रात लगभग साढ़े नौ घंटे सोते थे। हमारे पूर्वज दिन भर खेतों में कमरतोड़ मेहनत करते थे और रात को घोड़े बेचकर सोते थे। तब टी.वी.

रेडियो, मोबाइल, बिजली आदि नहीं थे, इसलिए रात को जागने की कोई वजह भी नहीं थी। इक्कीसवीं सदी में हम रात को लगभग छह घंटे ही सो पाते हैं (यानी हम अपने पूर्वजों से 35 प्रतिशत कम सो रहे हैं)। इसके अलावा, हमारी नींद की गुणवत्ता भी ज़्यादा अच्छी नहीं रहती है, क्योंकि हम अपने पूर्वजों की तरह कठोर श्रम नहीं करते हैं। हमारी नींद कम हो पाती है, इसका मुख्य कारण यह है कि हमें यह पता ही नहीं होता कि देर रात तक जागना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, क्योंकि इंसान का शरीर रात को जागने के लिए नहीं बना है। यह दिन में जागने और रात में सोने के लिए बनाया गया है

 अगर आप हर रात को 8-9 घंटे सोने लगेंगे, तो केवल इसी से आपके स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार दिखने लगेंगे। आजकल हम सोने से ज़्यादा समय बैठने में लगा रहे हैं। हम हर दिन लगभग 9-10 घंटे बैठते हैं और चूँकि हमारा शरीर इतने लंबे समय तक बैठने के लिए नहीं बनाया गया है, इसलिए मोटापे और डाइबिटीज जैसी समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। इसलिए अपनी बैठक कम करें और लेटना शुरू करें। अच्छी नींद के बहुत से फ़ायदे होते हैं। इससे सेरोटॉनिन का स्तर बढ़ता है, जिससे हम ज़्यादा स्पष्टता से सोच सकते हैं। अच्छी नींद से पाचक हॉरमोन लेप्टिन का उत्पादन बढ़ता है, जो आपको ज़्यादा खाने से रोकता है। अच्छी नींद से भूख बढ़ाने वाला हॉरमोन घ्रेलिन कम होता है। यानी अच्छी नींद से आपका वज़न भी कम हो सकता है। नींद की कमी से मोटापा बढ़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है, इनफ्लेमेशन बढ़ता है और हृदय रोगों की आशंका भी बढ़ती है। इससे दिमाग़ भी पर्याप्त तेज़ी से काम नहीं कर पाता है और इंद्रियाँ शिथिल हो जाती हैं। यदि आप कम सोते हैं, तो आप ज़्यादा खाते हैं। आपकी याददाश्त कमज़ोर होती है। आप जल्दी-जल्दी बीमार होते हैं। आप चिड़चिड़े रहते हैं। आपका व्यायाम करने का मन नहीं होता। आपको हर काम में आलस आता है। ऊपर लिखी बातों से आपको यह समझ आ गया होगा कि 8 घंटे की नींद वैकल्पिक नहीं है। यह तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। हिंदी हेल्थ प्वाइंट (hindi health point) की बात न भूलें, ‘निद्रा वह सुनहरी जंज़ीर है, जो स्वास्थ्य और हमारे शरीर को एक साथ बाँधकर रखती है।’ तो फिर देर किस बात की है? 8 घंटे सोने का संकल्प लें। इसके लिए आपको कोई मेहनत नहीं करनी है!

मल्टीविटामिन टेबलेट खाएँ

‘अगली बार जब कोई डॉक्टर कहे कि आपको जितने विटामिनों और मिनरल्स की जरूरत है, वे आपको भोजन से ही मिल सकते हैं, तो उससे यह सवाल पूछें : ”कल आपने कितने माइक्रोग्राम फोलिक एसिड खाया?“’ -डॉ. ड्यूक जॉनसन इस शॉर्टकट में भी आपको बिलकुल मेहनत नहीं करनी है। बस एक मल्टीविटामिन-मल्टीमिनरल-एंटीऑक्सीडेंट टेबलेट रोज़ खाना है

और मैं जानता हूँ कि आप इतनी मेहनत तो कर ही सकते हैं। मेरे एक मित्र को स्वास्थ्य और वज़न संबंधी कुछ समस्याएँ थीं। एक दिन उसने मुझसे कहा कि उसने एक डॉक्टर को दिखाया है और उसकी गोलियाँ खाने के बाद वह ऊर्जावान महसूस कर रहा है तथा दिन भर मेहनत करने के बावजूद उसे ज़रा भी थकान महसूस नहीं होती। मैंने उससे पहला प्रश्न यह पूछा, ‘क्या उसने कोई मल्टीविटामिन दिया है?’ मेरे मित्र ने कहा, ‘हाँ।

मेरे मित्र को विटामिनों की कमी थी, जिसकी वजह से उसे समस्याएँ आ रही थीं और जब डॉक्टर के दिए विटामिनों से उसके शरीर को आवश्यक विटामिन मिल गए, तो वह ऊर्जावान महसूस करने लगा। इसलिए स्वस्थ रहने का दूसरा शॉर्टकट है : मल्टीविटामिन टेबलेट खाएँ। 80 प्रतिशत लोग उतने फल और सब्ज़ियाँ नहीं खा रहे हैं, जितने उन्हें खाने चाहिए। नतीजा यह है कि आज संसार के 2 अरब से ज़्यादा लोग आइरन, आयोडीन, विटामिन ए, जिंक, कैल्शियम, फोलेट और बी ग्रुप के विटामिनों की कमी के शिकार हैं।

2 अरब का मतलब होता है संसार की एक तिहाई आबादी। संसार के ज़्यादातर लोगों की बीमारी का कारण यह होता है कि उनके शरीर को वे पोषक पदार्थ नहीं मिल पा रहे हैं, जो इसे चाहिए। अगर आप मल्टीविटामिन टेबलेट खाते हैं, तो इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि आपके शरीर को वे सारे पोषक पदार्थ मिल रहे हैं, जो इसे चाहिए। ध्यान रहे, बाज़ार में ढेरों मल्टीविटामिन गोलियाँ उपलब्ध हैं। आपको सोच-विचार करके ऐसा ब्रांड चुनना चाहिए, जिसके विटामिन प्राकृतिक स्त्रोत से लिए गए हों या ‘बायोअवेलेबल’ हों, जिन्हें आपका शरीर आसानी से पचा सकता हो। अच्छा मल्टीविटामिन चुनें और विटामिन की कमी के कारण अपने शरीर को बीमार न होने दें।