सावन लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स | Hindi Short Stories लोकगीत
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सावन लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स | Hindi Short Stories लोकगीत

66 views • Sep 10th, 2020

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए सावन के कुछ ऐसे गीतों “सावन लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स” का समावेश करने जा रहें हैं जिन्हें आप अपने घर-परिवार में रोजमर्रा के काम-काज के साथ गुनगुना सकते हैं|

सावन लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स

ज्यों ज्यों बूँद परत चूनर पर,

    त्यों त्यों हरी उर लावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

अधिक झंकोर होत मेघन की,

    द्रुम तरु छिन छिन गावत आवत ॥ कुन्जन  में ….

वे हँसि ओट करत पीताम्बर,

    वे चुनरी उन उढ़ावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

भीजे राग रागिनी दोऊ,

    भीजे तन छवि पावनआवत ॥ कुन्जन  में ….

लै मुरली कर मन्द घोर स्वर,

    राग मल्हार बजावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

तैसे ही मोर कोकिला बोलत,

    अधिक पवन घन भावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

सूरदास प्रभु मिलन परस्पर,

    प्रीत अधिक उपजावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

शब्दार्थ : आवत = आते हैं, परत = पड़ती हैं, लावत = लाते हैं, झंकोर = गड़गड़ाहट की ध्वनि, उन = उन्हें, बजावत = बजाते हुए, उपजावत = उत्पन्न करते हुए


कृष्ण हिंडोले | सावन लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स

कृष्ण हिंडोले बहना मेरी पड़ गये जी,
       ऐजी कोई छाय रही अजब बहार

सावन महीना अधिक सुहावनौ जी,
       ऐजी जामें तीजन कौ त्यौहार
मथुरा जी की शोभा ना कोई कहि सके जी,
ऐजी जहाँ कृष्ण लियौ अवतार

गोकुल में तो झूले बहना पालनो जी,
       ऐजी जहाँ लीला करीं अपार।  
वृन्दावन तो बहना सबते है बड़ौ री,
       एजी जहाँ कृष्ण रचायो रास।
मन्दिर मन्दिर झूला बहना मेरी परि गये जी
एजी जामें झूलें नन्दकुमार
राग रंग तो घर घर है रहे जी,
ऐजी बैकुण्ठ बन्यौ ब्रजधाम।
बाग बगीचे चारों लंग लग रहे जी,
ऐजी जिनमें पंछी रहे गुंजार
मोर पपैया कलरब करत हैं जी,
ऐजी कोई कोयल बोलत डार
पावन यमुना बहना मेरी बहि रही जी,
ऐजी कोई भमर लपेटा खाय
ब्रजभूमी की बहना छवि को कहै जी,
ऐजी जहाँ कृष्ण चराईं गाय
महिमा बड़ी है बहना बैकुण्ठ तै जी,
एजी यहाँ है रहे जै जैकार।  

शब्दार्थ : जामें = जिसमें, लंग = ओर / तरफ


झुकी है बदरिया कारीकब आओगे गिरधारी

झुकी है बदरिया कारीकब आओगे गिरधारी।

उमड घुमड कर घिरी हैं घटाएँ,

       घोर शब्द होए भारी,  कब आओगे गिरधारी।

धड धड कर यह जियरा धडके,

       आए याद तुम्हारीकब आओगे गिरधारी।

पी पी शोर मचाए पपीहा,

       कोयल अम्बुआ डालीकब आओगे गिरधारी।

गरज गरज कर इन्द्र डरावे,

       देख अकेली नारीकब आओगे गिरधारी।

रिमझिम रिमझिम मेहा बरसे,

       भीजे चुनर हमारीकब आओगे गिरधारी।

ओ किशोर चितचोर साँवरे,

       चाकर मैं शरणाईकब आओगे गिरधारी।


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