Obesity के बारे में सब कुछ
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Obesity के बारे में सब कुछ

32 views • Oct 15th, 2020

Obesity क्या है

शरीर की उस विशिष्ट अवस्था को कहते हैं, जब वसामेय (एडिपोस) ऊतकों स्नायुओं को वंशानुगत रूप से पाते हैं, वे मानक वजन से अधिक वज़नी होते हैं,, कीटों का अधिक वैज्ञानिक निर्धारण शरीर के कुल वज़न के अनुपात में वसा या मेद की मात्रा होता है।

 शरीर में वसा का औसत सामान्य युवा पुरुषों के लिए लगभग 12 प्रतिशत और युवा स्त्रियों के लिए लगभग 26 प्रतिशत होता है मोटापा सा का चरम संग्रह हो गया है।  :: यह अवस्था तब पैदा होती है, जब खाद्यपदार्थों का अंतर्ग्रहण दैहिक आवश्यकताओं से अधिक होता है।  पश्चिम के देशों में मोटापा सामान्य है और भारत और अन्य देशों में यह बीमारी उच्च वर्ग के लोगों में पाई जाती है।  मोटापा किसी भी उम्र के महिला या पुरुष को हो सकता है। 

 जो लोग ज्यादा खाना खाते हैं और स्थानबद्ध जीवन जीते हैं, उनमें यह बीमारी अधिक होती है।  स्त्रियाँ प्रसूति के बाद और रजोनिवृत्ति के समय मोटापा से पीड़ित रहती है।  प्रसूतावस्था के दौरान, महिला का वज़न 12 किलो बढ़ जाता है। 

 वज़न में इस वृद्धि का कुछ हिस्सा, एडिपोस ऊतकों में वृद्धि पैदा करता है, जो स्तनपान की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संग्रह के रूप में कार्य करता है।  कई स्त्रियों का वजन बहुत बढ़ जाता है और प्रसूति के बाद भी बज़न में इस वृद्धि का कुछ हिस्सा बना रहता है।  बाद में, प्रत्येक बच्चे के होने के बाद उनका मोटापा उत्तर अवस्था में जाता है। 

 निर्धारण (असेसमन)

 सामान्य तौर पर मोटापा को निर्धारित करने के लिए उम्र, लिंग और ऊँचाई के अनुसार मरीज़ के वज़न को मानक वज़न के चार्ट से तुलना करने के बाद उन्हें दस, बीस या तीस प्रतिशत अधिक की श्रेणियों में विभाजित किया जाता है।  फिर भी, सामान्य वज़न का आधार शरीर के गठन पर है और कुछ लोग, जो बड़ी कद – काठी और भारी भरकम. है।

  जिस पुरुष के शरीर में वसा की मात्रा उसके शरीर के कुल वजन का 20 प्रतिशत से अधिक हो, तो उसे मोटा कहा जाता है और महिला के लिए यह प्रतिशत 30 प्रतिशत से अधिक हो, तो उसे मोटापा की अवस्था माना जाता है। 

 मोटापा स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है क्योंकि अतिरिक्त वसा से हृदय, गुदा और लिवर और जांघों, घुटनों, टखनों जैसे शरीर का वजन उठानेवाले जोड़ों पर प्रसव पड़ता है, जिससे आखिर में जीवन की अवधि कम हो जाती है।  वास्तव में यह सही कहा गया है, 'कमर का दर्द जितना लंबा होगा, जीवन उतना ही छोटा होगा।  

"अधिक वजनवाले व्यक्ति कई रोगों, जैसे हृदयरोग, हृदय में अवरोध, हृदय का रुक जाना, उच्च रक्त, मधुप्रमेह, गठिया, गाउट और लिवर और पित्ताशय के विकार के शिकार आसानी से बन सकते हैं। 

कारण

 मोटापे के प्रमुख कारण अक्सर बहुत अधिक भोजन ही होते हैं।  है, अर्थात् शरीर की ज़रुरतों से ज्यादा कैलरी का अंतर्ग्रहण। कुछ लोगों को बहुत ज्यादा खाने की आदत होती है, जब कि कुछ अन्य लोगों को उच्च कैलरीवाले खाद्यपदार्थ खाने की आदत होती है। ये लोग लगातार वज़न बढ़ाते जाते हैं क्योंकि उर्जा की कम ज़रूरतें होती हैं।  के अनुसार वे अपनी भूख का मेल नहीं बिठा पाते हैं। हाल के समय में, मोटापे के मनोवैज्ञानिक पहलुओं के बारे में काफी जागरूकताुकता पाई जाती है।

 आमतौर पर जो लोग ऊब जाते हैं, नाखुश रहते हैं, अकेलेपन महसूस करते हैं या जिनका प्यार नहीं है।  करता है, जो अपने परिवार या सामाजिक या आर्थिक स्थिति से संतुष्ट नहीं है, वे बताते हैं: अधिक खाने हैं क्योंकि भोजन ग्रहण करना उनके लिये आनद और सांत्वना की बात है। कभी कभी मोटापा थायरोइड या पिट्यूटरी ग्रंथियों के कारण भी होता है।  विकार मंटल के कुल मामलों में से सिर्  एफ, लगभग दो प्रतिशत ही होते हैं।

 ऐसे व्यक्तियों में पेशारी चयापचय दर (बेसेल मेटाबोलिक रेट) कम होता है और अगर में कम कैलरीयुक्त आहार न लें तो उनका वजन ही बढ़ जाता है।  

आहार द्वारा इलाज

 आहार द्वारा इलाज के एक उपयुक्त योजनाबद्ध का के साथ।  वाया व्यायाम जी तटस्थकासन के अन्य उपाय ही मोटापे को वैज्ञानिक ढंगको दूर करने का एकमात्र सीमा है।  इस इलाज में मुख्य रूप से यह ध्यान रखना चाहिए कि किशम ज्यादा - से - ज्यादा आवश्यक पोषक तत्त्व जिन्हें किसी भी तरह से प्राप्त किया जाता है, नमकीन स्वाद का मानना है


चयन करना चाहिए।  शुरुआत में, रोगी को सात से दस दिनों तक रस पीकर उपवास करना चाहिए।  इस दौरान, नींबू, चकोतरा, संतरा, अन्ननास, पत्तागोभी और अजवाइन के पत्तों का रस लिया जाता है।  रस पीकर 40 दिनों तक लम्बी उपवास भी किया जा सकता है।  लेकिन यह विशेषज्ञ के मार्गदर्शन और देखने में होना चाहिए। 

 पर्याय के रूप में, रस के साथ अल्पकालिक उपवास को दो या अधिक महीनों के नियमित अंतराल पर कास्टिंगाना चाहिए ताकि वजन को कम किया जा सके।  उपचार के शुरुआत के दिनों में और यदि आवश्यकता हो तो बाद में भी, प्रतिदिन आँतों को साधारण गर्म पानी से एनिमा का प्रयोग साफ करें।  रस के साथ उपवास के बाद, रोगी को चार से पांच दिनों के लिए सिर्फ फलाहार लेना चाहिए। 

 पथ्य के इस दौर में, प्रति दिन, तीन बार ताजे रसदार फल जैसे संतरा, चकोतरा, अन्ननास और पपीता लेने चाहिए।  उसके बाद, क्रमिक रूप से वह कम कैलरीकृतुसंतुलित आहार शुरू कर सकता है, जो तीन मूलभूत खाद्यपदार्थो के समूह अर्थात् बीज, सूखे मेवे और अनाज, साग – सब्जियों और फलों से बना हो।  इस आहार में कच्चे फल, प्रदूषण और फल के ताजा रस को अधिक महत्व देना चाहिए।  जिन खाद्यपदार्थों को बहुत कम मात्रा में लेना चाहिए या जिनसे परहेज करना चाहि