पत्तागोभी क्या है
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पत्तागोभी क्या है

43 views • Oct 21st, 2020

वैसे तो कोई भी हरी सब्जी हो, स्वास्थ्य के लिए सभी लाभदायक होती हैं; लेकिन पत्तागोभी में स्वास्थ्य और सौंदर्यवर्धक तत्त्व अपेक्षाकृत ज्यादा मात्रा में होते हैं। इस बात की पुष्टि स्वास्थ्य और सौंदर्य विशेषज्ञों ने भी की है। पत्तागोभी उच्च स्तरीय पोषक तत्त्वों से भरपूर सब्जी है। पूरी दुनिया में इसे बड़े चाव से खाया जाता है। जैसा कि नाम से ही जाहिर है, यह पत्तों से भरी होती है, जो फूल की बंद कली के आकार में इसे ढके रहते हैं।

यह शरीर की अशुद्धियों को दूर कर मांसपेशियों को सुदृढ़ बनाती है। पत्तागोभी की अनेक जातियाँ हैं। आकार में गोभी छोटी-बड़ी होती हैं। मुख्य रूप से इनको चार वर्गों में बाँटा जा सकता है—गोल, बेलनाकार, सपाट या ड्रम की तरह और शंकु के आकारवाली। पत्तागोभी को वनस्पति में ‘ब्रास्सिका ओलेराचेआ वैरा कपिताता’ के नाम से जाना जाता है। इसकी उत्पत्ति का इतिहास मानव इतिहास की तरह ही पुराना है।

प्राचीन ग्रीकवासी इसे बहुत महत्त्वपूर्ण सब्जी मानते थे। इसके अलावा इसने रोम में भी लोकप्रियता पाई। पत्तागोभी का मूल उद्गम स्थान दक्षिण यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्र रहे हैं; लेकिन अब तो यह पूरी दुनिया में पसंद की जाती है। इसके लिए ठंडा और आर्द्र मौसम सबसे अनुकूल होता है। भारत में यह सर्दी के मौसम में उगाई जाती है।

आहार मूल्य

बंदगोभी में उच्च स्तरीय खनिज, विटामिन और अल्कालाइन नमक पाया जाता है। प्रत्येक 100 ग्राम खाद्य भाग में आर्द्रता 91.9, प्रोटीन 1.8 और कार्बोहाइड्रेट 0.1 प्रतिशत पाया जाता है। कैरोटीन 1200 माइक्रो ग्राम, थायमिन 0.06, रिबोफ्लोविन 0.09, नायसिन 0.4 और विटामिन ‘सी’ 124 मि.ग्रा. है। इसके साथ ही इससे क्लोरीन और सल्फर भी मिलता है। इसका कैलोरिक मूल्य 27 है।

हरे पत्तोंवाली गोभी में विटामिन ‘ए’ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। औषधीय गुण यह शरीर की अशुद्धियों को साफ करनेवाली और मोटापे को दूर करनेवाली सब्जी है। इसमें पाए जानेवाले सल्फर, क्लोरीन व आयोडीन अत्यंत महत्त्वपूर्ण तत्त्व हैं। सल्फर और क्लोरीन मिलकर पेट एवं आँतों की सफाई करती हैं; लेकिन यह तभी संभव है जब पत्तागोभी या उसके रस को बिना नमक मिलाए कच्चा ही प्रयोग किया जाए।

कब्ज : पेट की गड़बड़ी दूर करने में पत्तागोभी ओषधि की तरह काम करती है। कब्ज होने पर अगर पत्तागोभी को भोजन के रूप में कच्चा ही प्रयोग किया जाए तो यह दवा की तरह तुरंत लाभप्रद साबित होती है। इसके लिए गोभी को बारीक काटकर थोड़ा नमक, काली मिर्च और नींबू का रस मिलाकर सेवन करना चाहिए।

पेट का घाव : पत्तागोभी का रस पीने से पेट का घाव अपने आप ही ठीक हो जाता है। करीब चालीस वर्ष पहले स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के गार्नेट चेनी एम.जे. ने पत्तागोभी के रस के गुण का पता लगाया था। उन्होंने इस के रस से पेट के घाव के कई मरीजों का सफल उपचार किया था। इसके रस में अल्सर प्रतिरोधक विटामिन ‘यू’ पाया जाता है।

लेकिन पत्तागोभी को पकाने पर उसका यह विटामिन नष्ट हो जाता है। उपचार के लिए दिन में तीन बार इसका छह औंस रस लेना चाहिए और उसके बाद प्राकृतिक भोजन करना चाहिए। पत्तागोभी के रस को स्वादिष्ट बनाने के लिए डॉ. चेनी इसमें अजवायन का रस (तना और हरे भाग), अनन्नास का रस, टमाटर का रस इत्यादि मिलाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा इस मिश्रित रस को स्वाद के लिए ठंडा भी किया जा सकता है। हाँ, एक बात ध्यान रखें कि सॉस व रस एक साथ नहीं लेने चाहिए। इसे धीरे-धीरे दिन में पिएँ। रस निकालने के लिए जूसर न हो तो कच्ची पत्तागोभी को ही दिन में चार या पाँच बार खाया जा सकता है।

मोटापा : पत्तागोभी में एक नए रसायन ‘टार्टनिक’ अम्ल का पता चला है। यह अम्ल शर्करा एवं कार्बोहाइड्रेट को वसा में परिवर्तित करता है। वजन कम करने में यह अम्ल अहम भूमिका अदा करता है। पत्तागोभी का सलाद ‘स्लिम’ और ‘बिना परेशानी के डाइटिंग’ करने का सरलतम तरीका है। पत्तागोभी में कैलोरी कम होती है, मगर वानस्पतिक तत्त्व अधिक होते हैं। साथ ही यह आसानी से पच जाती है और काफी समय तक पेट भरा रहने का अहसास कराती है।