Vedavati kahani in hindi | वेदवती की कथा | हिन्दू धार्मिक कथाएँ
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Vedavati kahani in hindi | वेदवती की कथा | हिन्दू धार्मिक कथाएँ

31 views • Sep 28th, 2020

एक बार कुशध्वज नाम के एक राजा थे । वह अत्यंत ज्ञानी थे इसलिए उन्हें देवगुरु ब्रहस्पति के पुत्र की भी उपाधि प्राप्त थी । उनकी एक पुत्री थी , जब उसका जन्म हुआ तब वह रोने के स्थान पर वेदों की महिमा गाने लगी , जिससे प्रसन्न होकर उसके माता पिता ने उस कन्या का नाम वेदवती रखा । वेदवती भगवान विष्णु को बहुत मानती थी ।

एक बार वेदवती तप करने बैठी थी । उसे तप करते करते तीन दिवस पूर्ण हुए । वह भूखी प्यासी थी । उनके पिता कुशध्वज ने जब यह देखा तो वह चिंतित हो उठे उन्होंने वेदवती की तपस्या भंग करने का निश्चय किया । तभी वातावरण में नारायण – नारायण नाम की ध्वनि उतपन्न हुई । वह ध्वनि देवऋषि नारद की थी ।

देवरिषि प्रकट हुए ओर उन्होंने राजा को वेदवती की तपस्या भंग करने से मना किया । ओर कहा की  आप ऐसा न करिए क्योकिज़22 वेदवती इस समय भगवान विष्णु के तप में लीन है , इस वक्त वेदवती को उठाना बिल्कुल एक शिशु से उसकी माता छीनने जैसा है । इसलिए हमारा निवेदन है कि कृपा कर आप वेदवती को उनकी साधना से न उठाए । यह बात सुनकर कुशध्वज रुक गए ओर वह चले गए ।

अप पढ़ रहें हैं Vedavati | वेदवती की कथा

कुशध्वज अपनी पुत्री के विषय मे चिंतित थे क्योंकि वेदवती का स्वभाव बिल्कुल भक्तिमय था और वह अपने तप में अधिक लीन रहती थी । कुशध्वज को यह चिंता थी कि वेदवती का विवाह कैसे होगा ? कोंन करेगा वेदवती से विवाह ? वेदवती की संतान होगी या नही ?

कोंन  पुरुष वेदवती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करेगा ? क्या वेदवती आजीवन अविवाहित रहेगी ? राजा ने यह सारी बात अपनी रानी को बताई ।

रानी भी अपनी पुत्री के स्वभाव से चिंतित रहती थी । फिर  उनके अंधकार भरे जीवन में एक ज्योत जली जब वेदवती ने एक दिन अपने पिता से कहा की वेदवती ने अपने आप के लिए एक वर पसन्द किया है ।

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